ग़ज़ल

चलो माना कि ये सब चोंचले हैं।
बतादो कौन से मज़हब भले हैं।।
जो दुनिया जोड़ने को बोलते हैं
उन्हीं सब की वज़ह से फासले हैं।।
मुहल्ले के शरीफों की न बोलो
उन्ही में हद से ज्यादा दोगले हैं।।
ज़हाँ बदनाम है उनकी वजह से
गला जो काटते मिलकर गले हैं।।
जो दिल में हो वो मुंह पे बोलते हैं
वो अच्छे हैं बुरे हैं या भले हैं।।
जो ऊँचे लोग हैं उनसे तो अच्छे
मुहल्लों के हमारे मनचले हैं।।
अभी भी प्यार बाकी हैं ज़हाँ में
अभी भी लोग कितने बावले हैं।।

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