ग़ज़ल

क्या सच है अनुमान लगा कर देखो।
इक दीवारों से कान लगा कर देखो।।
कमियां तो हम में भी हैं तुम में भी
अपने अंदर ध्यान लगा कर देखो।।
डर में ताकत भी है काबिलियत भी
केवल कटि में म्यान लगा कर देखो।।
एक मसीहा मैं भी हो सकता हूँ
बस मुझमें  ईमान लगाकर देखो।।

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