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Showing posts from May, 2013

श्रीराम स्तुति

जय राम रमा रमनं समनं जय राम राम रमनं समनं । भव ताप भयाकुल पाहि जनम ॥
अवधेस सुरेस रमेस बिभो । सरनागत मागत पाहि प्रभो ॥
दससीस बिनासन बीस भुजा । कृत दूरी महा महि भूरी रुजा ॥
रजनीचर बृंद पतंग रहे । सर पावक तेज प्रचंड दहे ॥
महि मंडल मंडन चारुतरं । धृत सायक चाप निषंग बरं ॥
मद मोह महा ममता रजनी । तम पुंज दिवाकर तेज अनी ॥
मनजात किरात निपात किए । मृग लोग कुभोग सरेन हिए ॥
हति नाथ अनाथनि पाहि हरे । बिषया बन पावँर भूली परे ॥
बहु रोग बियोगन्हि लोग हए । भवदंघ्री निरादर के फल ए ॥
भव सिन्धु अगाध परे नर ते । पद पंकज प्रेम न जे करते ॥
अति दीन मलीन दुखी नितहीं । जिन्ह के पद पंकज प्रीती नहीं ॥
अवलंब भवंत कथा जिन्ह के । प्रिय संत अनंत सदा तिन्ह के ॥
नहीं राग न लोभ न मान मदा । तिन्ह के सम बैभव वा बिपदा ॥
एहि ते तव सेवक होत मुदा । मुनि त्यागत जोग भरोस सदा ॥
करि प्रेम निरंतर नेम लिएँ । पड़ पंकज सेवत सुद्ध हिएँ ॥
सम मानि निरादर आदरही । सब संत सुखी बिचरंति मही ॥
मुनि मानस पंकज भृंग भजे । रघुबीर महा रंधीर अजे ॥
तव नाम जपामि नमामि हरी । भव रोग महागद मान अरी ॥
गुण सील कृपा परमायतनं । प्रणमामि निरंतर श्रीरमनं ॥
रघुनंद निकंदय द्वंद्…

सीबीआई को स्वतंत्र करना लोकतन्त्र की हत्या करना है ।

वह दिन भारतीय लोकतंत्र का काला दिन होगा जिस दिन सीबीआई और पुलिस स्वतन्त्र अर्थात निरंकुश हो जाएगी । अभी सरकार का अंकुश है तब जाँच संस्थायें और पुलिस के अत्याचार आम है । निरंकुश होने पर उसकी भूमिका देश में इमरजेंसी जैसे हालात पैदा कर देगी । कोई भी संवैधानिक पद या संवैधानिक संस्था निरंकुश नहीं होनी चाहिए । अपने देश के संविधान में अच्छाई है कि हर संवैधानिक संस्था स्वायत्त होते हुए एक दुसरे के प्रति जबाबदेह भी है । व्यवस्थापिका ,कार्यपालिका और न्यायपलिका तीनों स्वतन्त्र रूप से कार्य करते हैं ,लेकिन जनता के प्रति सभी जबाबदेह भी हैं । जनता का मूर्त रूप उनके प्रतिनिधि होते हैं । इसलिए उनकी सर्वोच्चता को मान्यता दी गयी है । किन्तु उसमे भी सभी एक दुसरे के प्रति जबाबदेह हैं । आज तोताराम जी ने अपनी लाचारी दर्शायी है । लेकिन यही तोताराम जब चारा घोटाले के समय डी आई जी थे तब इन्होने कई नेताओं को बचाने का काम किया था । अगर यह ईमानदारी से अपना कार्य करते और खुद को लोक कार्यकारी समझते तो आज सुप्रीम कोर्ट से फटकार ना खाते ।

चीन से युद्ध छेड़ना कितना उचित होगा?

अभी कुछ दिनों पहले ही जनरल विक्रम सिंह जी ने कहा था ,कि हमारे पास युद्ध की स्थिति में पंद्रह दिन से अधिक भिड़ने का साजो सामान नहीं है । चीन आज विश्व की पहले नंबर की आर्थिक और सामरिक शक्ति है । सबसे अधिक स्वर्ण और विदेशी मुद्रा भंडार चीन के पास है । अमेरिका ,रूस और यूरोपीय यूनियन के देश चीन के पैसों से अपनी ढहती अर्थव्यवस्था को सम्हाल रहे हैं । चीन दुनिया का सबसे बड़ा हथियार विक्रेता है और भारत सबसे बड़ा खरीदार है । हम अपनी तकनीक से एक ढंग की रिवाल्वर नहीं बना पाए हैं ,और चीन  निर्मित ए के -47 दुनिया का नब्बे प्रतिशत आतंकवादी लेकर घूमता है । भारत के कितने नेता हैं जिनके पुत्र सेना में हैं?जबकि चीन का हर नागरिक तीन साल की सेवा सेना में सैनिक के रूप में देता है । हम दुनिया के सबसे बड़े कर्जदार देश हैं । क्या यह युद्ध हमें आर्थिक मजबूती देगा?सीमा पर जो तनाव है वह इसीलिए है क्योंकि आजतक भारत और चीन की सीमारेखा का निर्धारण नहीं हुआ है । एक आभासी सीमारेखा ही इसकी पूरक मानी गयी है । हमने भी दक्षिणी चीन सागर में हस्तक्षेप किया हुआ है ,जिसका चीन लगातार विरोध कर रहा है । बताईये चीन से युद्ध छेड़…