लेना- देना तो होता है
प्यार मगर व्यापार नहीं है।
अग्नि परीक्षा ले लो लेकिन
अविश्वास स्वीकार नहीं है।।
मेरा हृदय तुम्हारा घर है
औरों का आगार नहीं है।।
कैसे तुमने मान लिया यह
हमको तुमसे प्यार नहीं है।।

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