मत कहना नाशाद हो गए।
लो अब तुम आज़ाद हो गए।।
एकतरफा थी प्रीत हमारी
हार हमारी जीत तुम्हारी
थी ये ऐसी साझेदारी
जिसमें हम बरबाद हो गए।।लो अब तुम
तन मन धन था तुम्हे समर्पित
रहे प्राण भी तुमको अर्पित
किन्तु न कर पाये आकर्षित
वरीयता में बाद हो गए।।लो अब तुम
किन्तु न अब होगी हैरानी
करना तुम अपनी मनमानी
ख़त्म हमारी राम कहानी
भूली बिसरी याद हो गए।।लो अब तुम

Comments

Popular posts from this blog

रेप और बलात्कार

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील