भैया हम हर हाल में खुश हैं।
अपनी रोटी दाल में खुश हैं।।
कोई अपने दांव में उलझा
कोई शकुनि चाल में खुश है।।
राग झिंझोटी दुनियादारी
हम अपनी सुर-ताल में खुश हैं।।
मुझको टैग न करना भैया
हम तो अपनी वाल में खुश हैं।।
दो नंबर सब तुम्हे मुबारक
हम मेहनत के माल में खुश हूँ।।
जिन्हें वोट की चिंता है वो
दंगा और बवाल में खुश हैं।।
काले को सफेद करते हैं
बाबा इसी कमाल में खुश हैं।
इससे अच्छे दिन क्या होंगे
मुर्ग नहीं तो दाल में खुश हैं।।
याद हमें तुम भी करते हो
तेरे इस अहवाल में खुश हैं।।
तुम को क्या लगता है फंसकर-
हम वादों के जाल में खुश हैं।।
सुन कुर्सी के भूखे नंगों
हम हल और कुदाल में खुश हैं।।
तुम दौलत पाकर रोते हो
हम हाले-कंगाल में खुश हैं।।

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