धूप जिंदगी छाँव जिंदगी जैसे कोई पड़ाव जिंदगी सिंधु कहे ठहराव जिंदगी नदिया कहे बहाव जिंदगी।।

जैसे कोई पड़ाव जिंदगी
सिंधु कहे ठहराव जिंदगी
नदिया कहे बहाव जिंदगी।।
धूप जिंदगी छाँव जिंदगी
जैसे कोई पड़ाव जिंदगी
सिंधु कहे ठहराव जिंदगी
नदिया कहे बहाव जिंदगी।।
bड़े बड़े शातिर लोगों को
दे देती है दांव जिंदगी।।
दुनिया के स्टेशन पर है
आओ जिंदगी जाव जिंदगी।।
भरम टूटना ही है एक दिन
केवल मन बहलाव जिंदगी।।
लाश बना शहरों में भटका
छूट गया जब गांव जिंदगी।।
मौत भले दे दे मुआवजा
फिरती है बेभाव जिंदगी।।
तेरी बेवफाई के चर्चे
होते हैं हर ठाँव जिंदगी।।
फिर तुझसे क्यों हो जाता है
इतना लाग-लगाव जिंदगी।।
इतने नाटक इतने नखरे
क्यों खाती है भाव जिंदगी।।
जो मरने से डर जाते हैं
देती उनको घाव जिंदगी।।
पर मेरे मन को भाता है
तेरा छली स्वभाव जिंदगी।।
मैं तुझ को जम कर जीयूँगा
तू क्या देगी दांव जिंदगी।।

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