अब तक कितने क़त्ल हुए हैं

अब तक कितने क़त्ल हुए हैं
अब तक कितने घर उजड़े हैं।
क्या लेना इन सब से हमको
दुःख के अवसर बहुत पड़े हैं ।
अब इतने सरमायेदारों के
हम पर एहसान बड़े हैं।।
खुश है हम बहुमत में आकर
देखें कितने वोट मिले हैं।।
मेरे सपने कितने सारे
झिलमिल झिलमिल जैसे तारे
पलकों पर तिरते रहते हैं।
अम्बानी के वारे न्यारे-
करते उन सपनों से प्यारे
मोदी जी खेला करते हैं

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