कांग्रेस की तरह किसलिए शैय्या पर लेटे हो

कांग्रेस की तरह किसलिए शैय्या पर लेटे हो
 उठो अन्ततः भारत माँ के तुम भी तो बेटे हो
उठकर युद्ध करो हे अर्जुन क्या पाबन्दी है।
तुमने जिसे शेर समझा ये वही शिखंडी है।।
गांव गली में घूम घूम कर जन जन से मिलकर
खोजो जनता के प्रश्नों के जनता में उत्तर
यही राजपथ पहुंचाने वाली पगडन्डी है।।
यह जनपथ से संसद तक पहुंचा भी सकती है
निरअंकुश को मिटटी में मिलवा भी सकती है
बनी पगलिया घूम रही ये ही रणचंडी है।।
राम नाम पर मार रहा भक्तों की डंडी है।
जिससे तुम भयभीत हो रहे हो पाखंडी है।।

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