हम ने खुद को खूब छला है।



हम ने खुद को खूब छला है।
इसका ये परिणाम मिला है।।
पहले अच्छे दिन के वादे
अब उनको कहता जुमला है।।
मैं ये भी हूँ मैं वो भी था
यह गिरगिट से बड़ी कला है।।
हम हैं जनम जात व्यापारी
अब तो समझो क्या मसला है।।
जीवन के आनंद मार्ग में
माता पत्नी बड़ी बला है।।
लोग चित्त है चारो खाने
किस ने ऐसा दांव चला है।।

Comments

Popular posts from this blog

रेप और बलात्कार

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील