बातें हैं बस लंबी चौड़ी।।

क्या समझे बातें बड़ी बड़ी।
क्या जानें बातें बड़ी बड़ी ।।
हमको तो रोटी नमक दाल
है सुबह शाम का मकड़ जाल
इनसे ही फुरसत पा लें हम
तब इण्टर नेट सम्हाले हम
तब जुड़े आपसे कोई कड़ी।।
तब जानें बातें बड़ी बड़ी
अपनी तो हारी बीमारी
बिक जाती है लुटिया थारी
बच्चों की शिक्षा औ ट्यूशन
हैं मुश्किल जैसे यक्ष प्रश्न
हर माह सामने रहे खड़ी
ऐसी विपदाएँ बड़ी बड़ी।।
तुम साठ साल तक लेओगे
तब ही हमको कुछ देओगे
मरने पर भी कुछ मिलना है
या मरने पर ही मिलना है
ये तुम्हरी बीमा की लकड़ी
बातें हैं बस लंबी चौड़ी।।

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