क्या सिंवइयों के साथ ईद करें।



किसके आने की हम उम्मीद करें।
जब गया वक़्त भी नहीं आता
तू भी गर वक़्त पर नहीं आता
क्या सिंवइयों के साथ ईद करें।।
हम परिंदों को घर में कैद करें
चहचहाहट भी रोक दें उनकी
सख्त पहरा करें हवाओं पर
पूछ कर चलने की तईद करें।
क्या इसी जीस्त की उम्मीद करें।।

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