वर्ग-संघर्ष वर्ग-संघर्ष


तुम इतराते हो,
कुचल कर एक मुट्ठी दूब
और इतराता है तुम्हारा दर्प -
या शासक होने का दंभ.
किन्तु तुम नहीं जानते
दूब दब-दब के भी हरियाती है.
और तुम्हारे बूट?
उनकी एक उम्र है
उम्र!
जिसकी मंजिल मृत्यु है,
मृत्यु !
जो शाश्वत है.---सुरेश साहनी

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