गिरगिट जैसा रंग बदलना

 प्यार उसे आता है करना । 
मैंने तो इतना ही जाना ,॥ 
,पल में माशा, पल में तोला 
उसकी फितरत अल्ला -2 ,॥ 
लाज -शर्म से बिलकुल हट के 
पल में उठना ,पल में गिरना ,॥ 
रूठा -रूठी ,मान -मनौव्वल 
प्यार -मुहब्बत ,खेल खिलौना,॥ 
सच पूछो तो जादू ही है ,
गिरगिट जैसा रंग बदलना ,॥
रात गुनाहों की सोहबत में ,
और सवेरे तौबा -तौबा ॥

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