दिल्ली चलो

कुछ बनना है तो दिल्ली चलो ,'मेरे मित्र कवि श्री अमरीक सिंह दीप ने यह कविता बीसेक साल पहले लिखी थी । मैं अक्सर देखता हूँ की सारी गोष्ठियां ,सम्मेलन ,कांफ्रेंस सब दिल्ली में होते हैं । इस हिसाब से लगता है , सारे बुद्धिजीवी दिल्ली  में ही रहते हैं । बाकि माने चूँ चूँ का मुरब्बा । शायद आशुतोष कुमार और अमरेन्द्र जैसे जे एन यू वाले मित्र मुझसे सहमत होंगे । 

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