क्या तआरुफ़ है मेरा भूल गए।

बाखुदा हम तो ख़ुदा भूल गए।।

एक बस तेरी गली याद रही

और हम अपना पता भूल गए।।

तुझको मालूम नहीं है ये अदा

क्या नहीं तेरे सिवा भूल गए।।

इसमें हैरत की कोई बात नहीं

तुम अगर तर्ज़े-वफ़ा भूल गए।।

Comments

Popular posts from this blog

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील