जो दमे-इश्क़ भर रहा होगा।
कोई अहले-जिगर रहा होगा।।
हुस्न बेशक़ उधर रहा होगा।
आईना सज सँवर रहा होगा।।
राहे-मक़तल चुनी है उल्फ़त ने
मौत से खाक़ डर रहा होगा।।
यार जैसा जलाल नामुमकिन
लाख शम्सो-क़मर रहा होगा।।
यूँ कभी हिचकियाँ नहीं आती
वो मुझे याद कर रहा होगा।।
हम ग़मे-हिज़्र से परीशां हूँ
क्या उसे भी अखर रहा होगा।।
दिल चुरा ले गया सरेमहफिल
उसमें कितना हुनर रहा होगा।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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