दिल की दुनिया जवान है अब भी।

हौसलों में उड़ान है अब भी।।


और ताबीर क्यों नहीं होंन्गे

उसके ख़्वाबों में जान है अब भी।।


दर्द तेरे न दर-ब-दर  होंगे

जिस्म अपना मकान है अब भी।।


हुस्न की शोखियाँ अज़ल से हैं

इश्क़ शीरी ज़ुबान है अब भी।।


फिर वहां हम नहीं गये लेकिन

दर्दे-दिल की दुकान है  अब भी।।


लग रहा जान लेके मानोगे

क्या कोई इम्तिहान है अब भी।।


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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