क्या ज़रूरी है ओहदे पर हो।
तुम किसी हाल में मोहतबर हो।।
प्यार रिश्तों में हो ज़रूरी है
फिर महल हो कि फूस का घर हो ।।
चाँद तारों की क्या ज़रूरत है
जीस्त जब प्यार से मुनव्वर हो।।
हम हैं उल्फत के आस्ताने से
कोई बेशक़ बड़ा सिकन्दर हो।।
साहनी कौन जानता है तुम्हें
अब न कहना कि तुम सुख़नवर हो।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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