मेरे दो सहकर्मी आपसी बातचीत में मशगूल थे। उनके चेहरे बता रहे थे कि वे दोनों किसी गम्भीर चर्चा में निमग्न हैं। इस बीच मैं उनके नज़दीक पहुंच चुका था। स्वभावतः मैंने पूछ लिया क्या बातें चल रही हैं भाई!क्या शेयर बाज़ार से जुड़ी बात है?
मित्र ने जवाब दिया," ऐसा कुछ नहीं भैया ! बस उज्ज्वल भाई कह रहे हैं कि ड्रम से बहुत डर लगता है। और यह बात मैं भी मानता हूँ!
मैंने उत्सुकता वश पूछा," ऐसा क्यों?
मित्र ने बड़े गम्भीर और शांत स्वर में कहा," भैयाजी! 16 टुकड़े ड्रम में ही मिले थे। और मेरे घर में तो दो ड्रम हैं।'
जाने क्यों मैं भी उनके भय से सहमत लगा।खैर!!!!
अभी कल की बात है । मेरे मित्र सुकुल जी बता रहे थे कि यार गेहूँ कटाई का सीजन आ रहा है।और पण्डिताइन दो ड्रम खरीदने का फरमान जारी करी हैं।
और तुम्ही दिलाओगे। हास्य व्यंग्य
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