क्या हुआ होश में हम जो आने लगे।
फिर से अपने कदम डगमगाने लगे।।
ठौर भी उस गली के ठिकाने लगे।
आशिक़ी तेरे करतब सुहाने लगे।।
दिल हमारा था जिसने भी चोरी किया
क्यों नज़र हम उसी से चुराने लगे।।
कुछ जुनूँ कोई वहशत दिखी क्या कभी
फिर कहाँ से उसे हम दीवाने लगे।।
क्या हुआ होश में हम जो आने लगे।
फिर से अपने कदम डगमगाने लगे।।
ठौर भी उस गली के ठिकाने लगे।
आशिक़ी तेरे करतब सुहाने लगे।।
दिल हमारा था जिसने भी चोरी किया
क्यों नज़र हम उसी से चुराने लगे।।
कुछ जुनूँ कोई वहशत दिखी क्या कभी
फिर कहाँ से उसे हम दीवाने लगे।।
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