चुप रहो इक मुकम्मल ग़ज़ल बन सके

प्यार का ख़ूबसूरत महल बन सके

ताज तैयार होने तलक चुप रहो।।

चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।साहनी

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