भूल बैठा था मग़र याद आया फिर मुझे मेरा शहर याद आया जब ज़रूरत न थी तेग याद रही वक़्त पड़ने पे सिपर याद आया अपने दिल की थी किसे खोज ख़बर दर्द उठते ही ज़िगर याद आया दिल में इक दर्द उठा और मुझे वो तेरा तीरे नज़र याद आया फिर तेरी राहगुज़र याद आयी फिर तेरे साथ सफ़र याद आया।।साहनी
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तीरगी अपनी करके हवाले मेरे। मुझसे हर ले गया वो उजाले मेरे।। कब मुअज्जम ने आने दिया बाम पर खाक़ सुनते ख़ुदाबन्द नाले मेरे।। सब है अपने समझना बड़ी भूल थी घर न मेरा न मस्जिद शिवाले मेरे।। मंजिलों मरहलों में बदलती रहीं बस निशानी हैं पावों के छाले मेरे।। बढ़ चुका हूँ मैं आगे तेरी सोच से अब तो रस्ते के पत्थर हटा ले मेरे।। साहनी सुरेश, कानपुर 9451545132