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 क्यों इतने बदहवास से बैठे हुए हो तुम। मुद्दत हुई उदास  से बैठे हुए हो तुम।। कपड़े नहीं ख़याल से जो बरहना लगे कुछ ऐसे बेलिबास से बैठे हुए हो तुम।।
 जब भी उसका ख़याल आया है। चश्मेंनम में उबाल आया है।। किसको दरकार है जवाब मिले आख़िरश क्यों सवाल आया है।।
 जीवन गोया यातना की बहुतेरी किस्म। रूह सदा ढोती रही मन पर बोझिल जिस्म।। दैहिक भौतिक मानसिक या फिर दैविक ताप । इन सब से  भारी रहे   सामाजिक सन्ताप ।। चाहत से चिन्ता बढ़ी बड़ी व्यर्थ परवाह। हुआ भिखारी के सदृश  मन का दौलतशाह।।
 ज़िन्दगी की यही कहानी है। रूह धोखा है जिस्म फानी है।। सिर्फ़ दो दिन हैं हुस्न के नखरें इश्क़ में फिर भी जावेदानी है।।साहनी
 शब्द शब्द से हुए पराये अक्षर अक्षर से ही रूठे। मैं भी गीत कहाँ से लिखता भाव कहाँ से लाता झूठे।। जब तुम थे ऐसा लगता था जैसे मुझको सब हासिल है कविता कहना कठिन नहीं है  गीत सजाना कब मुश्किल है ये सब मेरे खेल खिलौने छूट गए तब जब तुम छूटे।। अक्षर ब्रम्ह जगत मिथ्या पर शब्द सशक्त कहे जाते है किन्तु वियोगी-पद लेते ही भाव विरक्त हुए जाते हैं होती सफल साधना कैसे ,सारे पुण्य समय ने लूटे।। खण्ड खण्ड हो गयी सृजनता महाकाव्य रह गए अधूरे जीवन की चलती चाकी में शेष बचे गीतों के चूरे टेक तुम्हारी पकड़ बच गए तुलसी से दो एक अनूठे।। सुरेशसाहनी
 मैं हैरां हूँ कि मैं इस दौर में हूँ। गनीमत है कि अब भी दौड़ में हूँ।। यहाँ अब जिंदगी जद्दोजहद है मैं अपने आप से ही होड़ में हूँ।। ग़नीमत है कि मेरा वोट भी है नहीं तो मैं कहाँ किस जोड़ में हूँ।। मुझे इंसान कब समझा किसी ने सभी के वास्ते मैं और में हूँ।। मैं इंसां हूँ इसी से मर रहा हूँ मैं दिल्ली में हूँ या लाहौर में हूँ।। सुरेशसाहनी
 माँ की दो रोटी में जैसे जग का प्यार छुपा  रहता था भूख नहीं होती थी तब भी  स्वतः भूख जागा करती थी अब भी दो रोटी आती है  किंतु औपचारिकताओं से पूरित स्नेह स्वार्थ मिश्रण अभिगुँथित  बड़े सलीके से उच्चारित कह दो तो दो और बना दूँ कैसे कह दूँ सोच रहा हूँ भूख मिट गई पेट भर गया फिर भी ऐसा क्यों लगता है मन जैसे संतृप्त नहीं है पढ़े लिखे हैं शिक्षित घर हैं सुविधाओं की कमी नहीं है अब चूल्हों में धुंआ नहीं है सोच रहा हूँ फिर से घर मे मिट्टी का चूल्हा ले आऊँ माँ तेरे खुरदुरे हाथ भी  कितने नरम नरम लगते थे शायद उनमे नेल नहीं थे नोक नुकीले पॉलिश वाले मां अनपढ़ थी पर अच्छी थी..... सुरेशसाहनी, कानपुर