ख़ुद को खुलकर किताब करना है। याने सबका हिसाब करना है।। हुस्न है क़ाबिले गुरुर सही इश्क़ भी लाजवाब करना है।।
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मेरे दो सहकर्मी आपसी बातचीत में मशगूल थे। उनके चेहरे बता रहे थे कि वे दोनों किसी गम्भीर चर्चा में निमग्न हैं। इस बीच मैं उनके नज़दीक पहुंच चुका था। स्वभावतः मैंने पूछ लिया क्या बातें चल रही हैं भाई!क्या शेयर बाज़ार से जुड़ी बात है? मित्र ने जवाब दिया," ऐसा कुछ नहीं भैया ! बस उज्ज्वल भाई कह रहे हैं कि ड्रम से बहुत डर लगता है। और यह बात मैं भी मानता हूँ! मैंने उत्सुकता वश पूछा," ऐसा क्यों? मित्र ने बड़े गम्भीर और शांत स्वर में कहा," भैयाजी! 16 टुकड़े ड्रम में ही मिले थे। और मेरे घर में तो दो ड्रम हैं।' जाने क्यों मैं भी उनके भय से सहमत लगा।खैर!!!! अभी कल की बात है । मेरे मित्र सुकुल जी बता रहे थे कि यार गेहूँ कटाई का सीजन आ रहा है।और पण्डिताइन दो ड्रम खरीदने का फरमान जारी करी हैं। और तुम्ही दिलाओगे। हास्य व्यंग्य
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अपने दिल की भी क्यों कही न करें। क्या करें हम जो आशिक़ी न करें।। उज़्र था उनको तीरगी से कभी अब वो चाहें हैं रोशनी न करें।। मर्ज़े-उल्फ़त से है शिकायत भी फिर कहे हो इलाज भी न करें।। इश्क़ भी बेख़ुदी में कर गुज़रे होश वाले तो ये कभी न करें।। फिर ये आदाब भी ज़रूरी हैं ये ग़लत है कि हम सही न करें।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
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मैंने एनसीआर में अधिवास करने वाले एक कवि साथी से चर्चा की। मेरी इच्छा थी कि भारत की साहित्यिक राजधानी में एक काव्य कलरव कार्यक्रम का आयोजन किया जाय। किसी शुभेच्छु ने सुझाव दिया था कि इस क्रम में दो एक गिद्ध भी मंच पर शोभायमान होंगे तो कार्यक्रम की गरिमा और बढ़ जाएगी। मैंने इसी लिए अपने दिल्ली प्रवास के दौरान उन साथी को फोन मिलाया। लेकिन उनसे संवाद के पश्चात मैं जैसे भकुआ गया। उन्होंने पूछा किसको किसको अपने मंच पर बुलाना चाहते हैं? मैंने उनसे काव्य जगत के अम्बानी जी को अपनी वरीयता सूची में प्रथम स्थान पर बिठा रखा था सो उनका ही नाम ले लिया। साथी कवि ने बड़ी सहजता से बोला, 'बीस लाख प्लस जीएसटी,। मैंने कहा , कुछ कम मूल्य में दयावान कवियों के नाम बताइए।' देखिए आपको अच्छा कार्यक्रम कराना है कि कविता करवानी है। अगर अच्छा कार्यक्रम करवाना है तो लगभग तीस लाख की व्यवस्था कर लीजिये। वरना आप से अच्छा कवि कौन है! अपने जैसे दस कवि बुला लीजिये।कार्यक्रम हो जायेगा। मैंने कहा कि भाई आप ही आ जाइयेगा। उन्होंने कहा कि,' डेढ़ लाख दे दीजिएगा। मैं भी आ जाऊँग...
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मेरी कविता बड़ी चटपटी और करारी है। या तहरी के साथ रसीली सी तरकारी है।। इसमें कन्या भ्रूण बचाने वाली लाइन है कन्या को भरपूर पढ़ाने वाली लाइन है मेरी कविता पूरी तरह दहेज विरोधी है इसमें नारी हक़ दिलवाने वाली लाइन है इस कविता में सकल सृष्टि की रक्षक नारी है।..... मेरी कविता बड़ी चटपटी और करारी है।।...... मैंने इस कविता में वन रक्षण पर बोला है वन जीवों पर गौरेया संरक्षण पर बोला है पर्वत नदियां हिमनदियों और जंगल की रक्षा सकल धरा पर बढ़ते परदूषण पर बोला है मेरी कविता मंचों की पूरी अधिकारी है।। मेरी कविता बड़ी चटपटी और करारी है।।...... इस कविता में सभी तरह के मिर्च मसाले हैं इसमें ओज देशभक्ति के तड़के डाले हैं इसमें पाकिस्तान को हमने धमकी भी दी है और चीन को विश्व शान्ति के मैसेज डाले हैं मेरी कविता रंग बिरंगी सबसे न्यारी है।। मेरी कविता बड़ी चटपटी और करारी है।।...... हास्य व्यंग्य सुरेश साहनी, कानपुर
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कभी कभी ऐसी ऐसी फ्रेंड रिक्वेस्ट आती है कि मन तीन चार दशक पीछे की ओर ऐसे भागने लगता है जैसे कि कउनो जवान बछरू कुलांच मारै। मन का मयूर कहरौवा नाच नाचने लगता है।अब एहिमा हँसने की क्या बात है! कउनो हम बुढा गये हैं क्या? खैर यह कोई आश्चर्य की बात भी नहीं है।जब बड़े बड़े ऋषि मुनि डोल जाते हैं तो हमारे जैसे आम की क्या बिसात कि चैत फागुन में ना बौराये।एक बार बढ़िया तो लगा। देखा कि हमारे कई विभागीय सन्तजन भी उनकी मित्र सूची में शामिल हैं। सो उनकी फिरेन्ड रिकवेस्ट स्वीकार करने के कई आधार बन रहे थे। और कवियों के बारे में यूँ कहाँ गया है कि ,"सुवरण को खोजत फिरत कवि,व्यभिचारी, चोर।।' फिर भी जैसा कि अपनी पुरानी आदत है कि सोशल मीडिया पर हम सोच विचार जाँच पड़ताल के बाद ही मित्र बनाते हैं।सो प्रोफाइल देखा। अब क्या बताये इतनी सुंदरता देखने के बाद बुद्धि तो जैसे घास चरने चली गयी। कुछ देर बाद जब लौटी तो देखा मैदान उतना साफ नहीं है।कई और जाने पहचाने जनावर पहले से चरन्त मुद्रा में उपस्थित हैं।अतः उत्साह थोड़ा सा तो ठण्डा हुआ।लेकिन दिल तो पागल है ना सो ठीक कैसे हो एकता है। ख़ै...