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 हर इक महरम की आदत हो गयी है। कि उसके  ग़म की आदत हो गयी है।। मिरे इस हाल पर हैरां न होना दरे-बरहम की आदत हो गयी है।। मिरी बदहालियों पर तंज करना अभी आलम की आदत हो गयी है।। मुहब्बत अशरफों में ढूँढता है उसे खातम की आदत हो गयी है।। उलझ कर रह गयी है जैसे हौव्वा यही आदम की आदत हो गयी है।। महरम/उपेक्षा,प्रतिबंधित संज्ञायें बरहम/अस्त व्यस्त, परेशान,कुद्ध आलम/संसार, स्थिति अशरफ/श्रेष्ठ, ऊँचे लोग खातम/ मुहर, ठप्पा या श्रेष्ठ चिन्ह सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
 माननीय सांसद महोदय बेलांव घाट टोल प्लाजा के दोहरे हत्याकाण्ड केस में एमपी एमएलए कोर्ट से बाइज्जत बरी किये। इसे न्यायिक प्रविधि का दोष ही कहेंगे कि ऐसे सज्जन जनप्रतिनिधि को अनवरत पन्द्रह वर्ष तक आरोपी के रूप में नाना प्रकार के संताप सहने पड़े।उन्हें हत्यारा क्रूर और बाहुबली कह कर अवमानित किया गया। जबकि माननीय इतने विनम्र हैं कि उन्होंने माननीय न्यायालय और न्यायपालिका के प्रति अगाध आस्था रखते हुये कृतज्ञता जताई।  हमें इस बात का गर्व है कि हम उस राज्य के निवासी हैं जहाँ बड़ी मात्रा में ऐसे लोकप्रिय , विनम्र और जुझारू जनसेवक उपलब्ध हैं। ये और बात है कि नकारा जनता ऐसे भले जनप्रतिनिधियों पर बड़ी मात्रा में मुकदमें लाद कर उनकी सेवा की भावना को आहत करती रहती है।   अब तो यह शंका भी बलवती होने लगी है कि वास्तव मे वे हत्यायें हुई भी थीं या नहीं।क्या पता संजय निषाद और नन्दलाल निषाद नामक व्यक्ति  मरे थे कि नहीं। पुलिस को  चाहिये कि वह उपरोक्त संदिग्ध मृतकों को अविलंब गिरफ्तार करे ताकि जनता जनार्दन का न्यायपालिका के प्रति विश्वास दृढ़ हो सके और ऐसे किसी भी माननीय को  ऐसा को...
 स्वयं सीजफायर करें भरें खुशी के जम्प। इक नोबल की आस में अपने भैया ट्रम्प।।साहनी
 जब भी फुर्सत में बैठते हो तुम क्या तुम्हें मेरी याद आती है।।साहनी
 माना तुम सरकार नहीं हो। पर इतने  लाचार नहीं हो।। सच को सच तो बोलो बेशक़ सच के  ठेकेदार नही  हो।। क्या दिक्कत है सच लिखने में सरकारी अख़बार नहीं हो।  इतने जुमले इतने धोखे इंसा हो अवतार नहीं हो।। कुछ तो हरकत हो चिंतन में क्या बिलकुल तैयार नहीं हो।। क्या ख़ुद को कमजोर बताना चीटीं से बेकार नहीं हो।।   नाविक हो तुम लड़ो साहनी बेशक़ पारावार नहीं हो।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
 रात का कब पता चला मुझको। दिन भटकता हुआ मिला मुझको।। रात आयी थी चाँदनी पहने दिन दिखा भी तो बरहना मुझको।। ग़ैर अपनों से बढ़ के काम आये जब सगे दे गये दगा मुझको।।  आदमी ने ख़ुदा बनाया है ख़ुद बता कर गया ख़ुदा मुझको।। जाने किसकी तलाश में था सुरेश ख़ैर मैं ढूंढ़ता रहा मुझको।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
 साथ उसके अगर नहीं कटती।। ज़िन्दगी उम्र भर नहीं कटती।। उस तरफ फिर भी कट ही जाती है ज़िंदगानी इधर नहीं कटती।। साथ मिलता तो काट लेते हम जीस्त तन्हा मगर नहीं कटती।। ज़िन्दगी क्या कहें कि बिन तेरे अपनी शामो सहर नहीं कटती।। साहनी क्या करे  शब-ए-हिज्राँ लाख हों मुख्तसर नहीं कटती।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132