यारों की कमज़र्फ़ी है तस्लीम मगर दुश्मन हो ख़ुद्दार हमेशा ध्यान रहे।।साहनी
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और किसको मलाल है मुझसे आज मेरा सवाल है मुझसे पाल बैठा हूँ ये ग़लतफ़हमी हर उरुज़ो-,जवाल है मुझसे मेरा होना है वक़्त का होना रात दिन माहो साल है मुझसे ग़म तेरे आज भी यतीम नहीं दर्द की देखभाल है मुझसे रात भर मैं ही मुझसे उलझा हूँ जिस्म मेरा निढाल है मुझसे मैं ज़माने की लय समझता हूं पर ज़माने की ताल है मुझसे जाने कितने असीर हैं मेरे साहनी तक निहाल है मुझसे सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
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स्वयं से युद्ध शिव तक ले चलेगा सदाचर बुद्ध शिव तक ले चलेगा हमारा मन हो शिव संकल्प वाला यही मन शुद्ध शिव तक ले चलेगा अभी तक इंद्रियों के वश में है मन करो अनिरुद्ध शिव तक ले चलेगा तुम्हारा क्रोध शिवता का क्षरण है न होना क्रुद्ध शिव तक ले चलेगा सहजतः योग से मन वृत्तियों को करोगे रुद्ध शिव तक ले चलेगा सुरेश साहनी कानपुर 9451545132