किस वफ़ा की तलाश है तुमको क्या ख़ुदा की तलाश है तुमको।। इश्क़ तुमको हुआ यकीन नहीं जब अना की तलाश है तुमको।। जिसको सुन कर वो लौट सकता था उस सदा की तलाश है तुमको।। कुछ तो सपनों से ख़ुद को दूर करो क्या हवा की तलाश है तुमको।। सुरेश साहनी कानपुर
आज अपने ख़िलाफ़ है सब कुछ मूड क्या आज ऑफ है सब कुछ मेरा उसका बंटा हुआ क्या है प्यार में हाफ हाफ है सब कुछ कुछ भी पढ़िए कोई न बोलेगा गोष्ठी में मुआफ़ है सब कुछ नींद जाने किधर है क्या बोलें यूँ तो बिस्तर लिहाफ है सब कुछ मेरा दिल मेरी जेब आईना और मौसम भी साफ है सब कुछ सुरेशसाहनी, कानपुर
जीवन गोया यातना की बहुतेरी किस्म। रूह सदा ढोती रही मन पर बोझिल जिस्म।। दैहिक भौतिक मानसिक या फिर दैविक ताप । इन सब से भारी रहे सामाजिक सन्ताप ।। चाहत से चिन्ता बढ़ी बड़ी व्यर्थ परवाह। हुआ भिखारी के सदृश मन का दौलतशाह।।