शायद तुम मुस्काना चाहो। खुशियों को अपनाना चाहो।। मन मत मारो पा सकते हो जो तुम दिल से पाना चाहो।। गागर फूटी एक दुखद है दूजी गागर ले सकते हो दुख पर रक़्स करो फिर देखो खुशियाँ मन भर ले सकते हो नभ ने बाँह पसार लिए हैं उड़ो अगर तुम आना चाहो ।। रात्रि गहन थी तो क्या अब तो सुखद लालिमा झांक रही है क्यारी क्यारी किलकी कलियां रश्मि रथों को ताक रही हैं उठो रोशनी बन यादों के तम को यदि बिसराना चाहो ।। पतझर का संकेत यही है ऋतु राजा को फिर आना है आना जाना जाना आना जीवन का ताना बाना है जीवन है संगीत समझ लो गाओ बस तुम गाना चाहो ।। सुरेश साहनी
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अक्सर उसको लोग ग़ज़ल भी कहते हैं। कुछ तो ज़िंदा ताजमहल भी कहते हैं।। उसे समझना बेशक़ मुश्किल है लेकिन उसको हर मुश्किल का हल भी कहते हैं।। कुछ कहते हैं मू - ए-मुकद्दस है तो कुछ लोग इसे ही हज़रत बल भी कहते हैं।। उसकी ज़ुल्फ़ें लंबी नज़्में लगती हैं कुछ उसको किस्मत का बल भी कहते हैं।। उसका चेहरा क्या नूरानी है वल्लाह देखने वाले सुर्ख कँवल भी कहते हैं।। जाने क्यों अब इस सुरेश को दीवाना कहने वाले ही पागल भी कहते हैं।। सुरेश साहनी, कानपुर
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तीरगी अपनी करके हवाले मेरे। मुझसे हर ले गया वो उजाले मेरे।। कब मुअज्जम ने आने दिया बाम पर खाक़ सुनते ख़ुदाबन्द नाले मेरे।। सब है अपने समझना बड़ी भूल थी घर न मेरा न मस्जिद शिवाले मेरे।। मंजिलों मरहलों में बदलती रहीं बस निशानी हैं पावों के छाले मेरे।। बढ़ चुका हूँ मैं आगे तेरी सोच से अब तो रस्ते के पत्थर हटा ले मेरे।। साहनी सुरेश, कानपुर 9451545132