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 अक्सर उसको लोग ग़ज़ल भी कहते हैं। कुछ तो ज़िंदा ताजमहल भी कहते हैं।। उसे समझना बेशक़ मुश्किल है लेकिन उसको हर मुश्किल का हल भी कहते हैं।। कुछ कहते हैं मू - ए-मुकद्दस है तो कुछ लोग इसे ही हज़रत बल भी कहते हैं।। उसकी ज़ुल्फ़ें लंबी नज़्में लगती हैं कुछ उसको किस्मत का बल भी कहते हैं।। उसका चेहरा क्या नूरानी है वल्लाह देखने वाले  सुर्ख कँवल भी कहते हैं।।  जाने क्यों अब इस सुरेश को दीवाना   कहने वाले ही पागल भी कहते हैं।। सुरेश साहनी, कानपुर
 भूल बैठा था मग़र याद आया फिर मुझे मेरा शहर याद आया जब ज़रूरत न थी तेग याद रही  वक़्त पड़ने पे सिपर याद आया अपने दिल की थी किसे खोज ख़बर दर्द उठते ही ज़िगर याद आया दिल में इक दर्द उठा और मुझे वो तेरा तीरे नज़र याद आया फिर तेरी राहगुज़र याद आयी फिर तेरे साथ सफ़र याद आया।।साहनी
 वो नीम की सन्टी से तशरीफ़ उधड़ जाना स्कूल न था गोया दहशत का इदारा था।।साहनी
 तीरगी अपनी करके हवाले मेरे। मुझसे हर ले गया वो उजाले मेरे।। कब मुअज्जम ने आने दिया बाम पर खाक़ सुनते ख़ुदाबन्द नाले मेरे।। सब है अपने समझना बड़ी भूल थी घर न मेरा न मस्जिद शिवाले मेरे।। मंजिलों मरहलों में बदलती रहीं बस निशानी हैं पावों के छाले मेरे।।  बढ़ चुका हूँ मैं आगे तेरी सोच से अब तो रस्ते के पत्थर हटा ले मेरे।। साहनी सुरेश, कानपुर 9451545132
 आदमखोरों की तादाद कहीं ज़्यादा है क्या होगा कुछ अदद भेड़ियों के मरने से।।साहनी
 वहीं लोग मंचों पे छाये मिले हैं।  जो ग़ैरों की नज़्म चुराये मिले हैं।। बताते हैं दुबई की फ्लाइट है उनकी टिकट गांव का पर कटाये मिले हैं।।साहनी
 क्या कोई रोशनी सम्हाले अब। तीरगी है मेरे हवाले अब। फ़िक़्र रहबर को सिर्फ़ अपनी है अपनी उम्मत को कौन पाले अब।।