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 वो हसीं रात फिर कभी न हुयी। आपसे बात फिर कभी न हुयी।। साथ बारिश में भीगना तय था यूँ के बरसात फिर कभी न हुयी।।
 चुप रहो इक मुकम्मल ग़ज़ल बन सके प्यार का ख़ूबसूरत महल बन सके ताज तैयार होने तलक चुप रहो।। चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।साहनी
 क्या तआरुफ़ है मेरा भूल गए। बाखुदा हम तो ख़ुदा भूल गए।। एक बस तेरी गली याद रही और हम अपना पता भूल गए।। तुझको मालूम नहीं है ये अदा क्या नहीं तेरे सिवा भूल गए।। इसमें हैरत की कोई बात नहीं तुम अगर तर्ज़े-वफ़ा भूल गए।।
 क्या ज़रूरी है ओहदे पर हो। तुम किसी हाल में मोहतबर हो।। प्यार रिश्तों में हो ज़रूरी है फिर महल हो कि फूस का घर हो  ।। चाँद तारों की क्या ज़रूरत है जीस्त जब प्यार से मुनव्वर हो।। हम हैं उल्फत के आस्ताने से कोई बेशक़ बड़ा सिकन्दर हो।। साहनी कौन जानता है तुम्हें अब न कहना कि तुम सुख़नवर हो।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
 प्रेम सौंदर्य की अर्चना कर सके नैन नत हो प्रणय याचना कर सके  रूप रतनार होने तलक चुप रहो।। चुप रहो प्यार होने तलक चुप रहो।।
 यदि जनता के साथ चलें तो सरकारों का गिरना तय है आज मशीनों का बहुमत है जनता का मत क्या मतलब है सब कुछ पूँजी से होना है सब हों सहमत क्या मतलब है सत्ता की ताकत को समझो हर विरोध का मरना तय है तुम  करते थे चोरी थी जो हम करते है  अब विकास है आओ साथ नहा लो गंगा उन्नति का ग्लोबल प्रयास है हरिश्चन्द्र अब क्या कर लेंगे रोहिताश्व का मरना तय है..... सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
 हमें हम छोड़कर बढ़ने लगे हैं। कई इस बात से कुढ़ने लगे हैं।। बहुत पछताए उन पर कहके गज़लें हमी सुनने हमीं पढ़ने  लगे हैं।। लगे है जा चुका है दौर अपना हमें सब फ्रेम में जड़ने लगे हैं।।  ये डर है बदगुमां करदे न शोहरत हवा में कुछ तो हम उड़ने लगे हैं।। कभी था साहनी भी एक शायर मगर अब सब उसे पढ़ने लगे हैं।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132