तेरे भी माँ बाप सोचते यदि कुछ ऐसा क्या तब तू इस दुनिया में आ पाया होता
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जो दमे-इश्क़ भर रहा होगा। कोई अहले-जिगर रहा होगा।। हुस्न बेशक़ उधर रहा होगा। आईना सज सँवर रहा होगा।। राहे-मक़तल चुनी है उल्फ़त ने मौत से खाक़ डर रहा होगा।। यार जैसा जलाल नामुमकिन लाख शम्सो-क़मर रहा होगा।। यूँ कभी हिचकियाँ नहीं आती वो मुझे याद कर रहा होगा।। हम ग़मे-हिज़्र से परीशां हूँ क्या उसे भी अखर रहा होगा।। दिल चुरा ले गया सरेमहफिल उसमें कितना हुनर रहा होगा।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
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दिल की दुनिया जवान है अब भी। हौसलों में उड़ान है अब भी।। और ताबीर क्यों नहीं होंन्गे उसके ख़्वाबों में जान है अब भी।। दर्द तेरे न दर-ब-दर होंगे जिस्म अपना मकान है अब भी।। हुस्न की शोखियाँ अज़ल से हैं इश्क़ शीरी ज़ुबान है अब भी।। फिर वहां हम नहीं गये लेकिन दर्दे-दिल की दुकान है अब भी।। लग रहा जान लेके मानोगे क्या कोई इम्तिहान है अब भी।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
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कश्ती में हलचल हो जाये। आओ एक ग़ज़ल हो जाये।। इश्क़ सरापा नूरानी हो हुस्न ज़रा श्यामल हो जाये।। बाहों को पतवार बना लें बेशक़ जग जलथल हो जाये।। मन घट प्रणयामृत से भर लो भव पथ सुगम सरल हो जाये।। उठें हिलोरें फिर संगम की तन शुचि मन निर्मल हो जायें।। कौन क़यामत तक रुकता है बेहतर है इस पल हो जाये।। आज सुरेश मिला है मिल लो ख़ूब सुना है कल हो जाये।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132