वेद कहे भगवान का है अव्यक्त सरूप। ये कहते जो हम कहें पूजो वह ही रूप।। एक तुम्हारे राम हैं एक हमारे राम। घट घट व्यापी राम पर काहे का संग्राम।। एक शुद्र ने कर लिया हरि का कीरत गान। क्या इतने से हो गये कलिमलीन भगवान।। उस प्रभु की क्या जाति है क्या है उसका धर्म। क्यों लड़ते हैं लोग जब नहीं जानते मर्म।। समदर्शी बन बांटता सर्दी बारिश धूप। और यहां हर जाति के अपने अपने कूप।। आज देश को दीजिये सौ टुकड़ों में तोड़। कल घट कर रह जायेंगे चिन्तक चंद करोड़।। सुरेश साहनी कानपुर
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हर इक महरम की आदत हो गयी है। कि उसके ग़म की आदत हो गयी है।। मिरे इस हाल पर हैरां न होना दरे-बरहम की आदत हो गयी है।। मिरी बदहालियों पर तंज करना अभी आलम की आदत हो गयी है।। मुहब्बत अशरफों में ढूँढता है उसे खातम की आदत हो गयी है।। उलझ कर रह गयी है जैसे हौव्वा यही आदम की आदत हो गयी है।। महरम/उपेक्षा,प्रतिबंधित संज्ञायें बरहम/अस्त व्यस्त, परेशान,कुद्ध आलम/संसार, स्थिति अशरफ/श्रेष्ठ, ऊँचे लोग खातम/ मुहर, ठप्पा या श्रेष्ठ चिन्ह सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
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माननीय सांसद महोदय बेलांव घाट टोल प्लाजा के दोहरे हत्याकाण्ड केस में एमपी एमएलए कोर्ट से बाइज्जत बरी किये। इसे न्यायिक प्रविधि का दोष ही कहेंगे कि ऐसे सज्जन जनप्रतिनिधि को अनवरत पन्द्रह वर्ष तक आरोपी के रूप में नाना प्रकार के संताप सहने पड़े।उन्हें हत्यारा क्रूर और बाहुबली कह कर अवमानित किया गया। जबकि माननीय इतने विनम्र हैं कि उन्होंने माननीय न्यायालय और न्यायपालिका के प्रति अगाध आस्था रखते हुये कृतज्ञता जताई। हमें इस बात का गर्व है कि हम उस राज्य के निवासी हैं जहाँ बड़ी मात्रा में ऐसे लोकप्रिय , विनम्र और जुझारू जनसेवक उपलब्ध हैं। ये और बात है कि नकारा जनता ऐसे भले जनप्रतिनिधियों पर बड़ी मात्रा में मुकदमें लाद कर उनकी सेवा की भावना को आहत करती रहती है। अब तो यह शंका भी बलवती होने लगी है कि वास्तव मे वे हत्यायें हुई भी थीं या नहीं।क्या पता संजय निषाद और नन्दलाल निषाद नामक व्यक्ति मरे थे कि नहीं। पुलिस को चाहिये कि वह उपरोक्त संदिग्ध मृतकों को अविलंब गिरफ्तार करे ताकि जनता जनार्दन का न्यायपालिका के प्रति विश्वास दृढ़ हो सके और ऐसे किसी भी माननीय को ऐसा को...