तुम्हें अपना बताना पड़ रहा है। मरासिम है निभाना पड़ रहा है।। बला से कोई रूठे या न रूठे हमें हम को मनाना पड़ रहा है।। हमें हम याद आये थे बमुश्किल अचानक भूल जाना पड़ रहा है।। तुम्हारे ग़म की दौलत छिन न जाये सहम कर मुस्कुराना पड़ रहा है।। शहर में पूछता है कौन किसको सड़क को गाँव आना पड़ रहा है।। कहाँ से रोशनी लाते वफ़ा की सो अपना दिल जलाना पड़ रहा है।। कभी महसूस होती थी मुहब्बत अभी कह कर जताना पड़ रहा है।। सुरेश साहनी कानपुर
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विष्णुपदी तू ही मातु तू ही शिवकेशिनी है तू ही गंगा तू ही मातु भारती है नर्मदे मध्य ही प्रदेश नहीं महाराष्ट्र गुजरात राज्य से भी ख़ुद को गुजारती है नर्मदे विंध्य सतपुड़ा मातु पाके तुझे धन्य हुए शिव विग्रहों को तू पखारती है नर्मदे जाके गुजरात पार म्लेच्छों को तो तारती है सिंधु को भी भव से उबारती है नर्मदे।। शांत रहूँ मातु तेरी तरह प्रशांत रहूँ हर्ष न प्रमाद न विषाद देना नर्मदे। जानता हूँ भली भांति कृपा है असीम तेरी भक्ति भाव उर में अगाध देना नर्मदे।। तू है निर्विवाद जैसे मैं भी निर्विवाद रहूँ जो भी देना मुझे निर्विवाद देना नर्मदे। गंगा पुत्र हूँ मैं आज आया हूँ तेरे समीप मौसी ही की ममता प्रसाद देना नर्मदे।।
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जब हमारे ही हम से टूट गए। हम से मजबूत ग़म से टूट गए।। मयकदे के वजू का देख असर रिश्ते दैरो- हरम से टूट गए।। उसका महफ़िल में यूँ अयाँ होना दीन वाले धरम से टूट गए।। फिर तो लज़्ज़त रही न रोज़े की जो सुराही के खम से टूट गए।। इतने नाज़ुक नहीं है हम यारब जो गिरे और धम से टूट गए।। तेरी आँखों को देखकर साक़ी हम हमारी कसम से टूट गए।। आशिक़ी के बहर में उतरे क्यों तुम अगर ज़ेरोबम से टूट गए।। सुरेश साहनी, कानपुर 2021 7 may
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क्या कहा हौलनाक है ही नहीं। इस से बढ़कर मज़ाक है ही नहीं।। इश्क़ को इत्तेफ़ाक़ जायज़ है हुस्न को इत्तेफाक है ही नहीं।। हुस्न परदा करे करे ना करे इश्क़ पर झाँक-ताक है ही नहीं।। आशिक़ी क्यों न हो तेरी ख़ारिज तू गिरेबान चाक़ है ही नहीं।। साहनी तुझ को होश है अब तक तू मिरा इश्तियाक़ है ही नहीं।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
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खुशी के पल सँजोना चाहती है। तमन्ना हँस के रोना चाहती है।। फलक बेशक़ जगाना चाहता हो ज़मीं भर नींद सोना चाहती है।। उसे मुझ से मुहब्बत खाक़ होगी वो नादाँ है खिलौना चाहती है।। थकी जाती है फिर भी ज़िंदगानी खुद अपनी लाश ढोना चाहती है।। मुहब्बत में मेरी हस्ती बिखर कर सरापा नूर होना चाहती है।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132