अपना कोई गाँव नहीं है। बनजारा हूँ ठाँव नहीं है।। जैसा हूँ वैसा दिखता हूँ ज़्यादा बोल बनाव नहीं है।। क्यों उनसे दुर्भाव रखूँ मैं बेशक़ उधर लगाव नहीं है।। पैरों में छाले हैं लेकिन मन पर कोई घाव नहीं है।। मन क्रम वचन एक है अपना बातों में बिखराव नहीं है।। जीवन है इक बहती नदिया पोखर का ठहराव नहीं है।। राम सुरेश न मिल पाएंगे अगर भक्ति में भाव नहीं है।। सुरेश साहनी कानपुर 9451545132
हम न होंगे तो सब कहेंगे क्या। यूँ भी कहने को सब रहेंगे क्या।। हम तो धारों से लड़ने आये हैं आप धारा में ही बहेंगे क्या।। ठीक है ग़म में रह लिये दो दिन दर्द ये उम्र भर सहेंगे क्या।। यूँ भी जिसको हमारी फिक्र नहीं उसकी फुरकत में हम दहेंगे क्या।। इश्क़ में कब भला उरूज मिला इश्क़ में साहनी लहँगे क्या।। सुरेश साहनी, कानपुर 9451545132
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