कश्ती में हलचल हो जाये।

आओ एक ग़ज़ल हो जाये।।


इश्क़ सरापा नूरानी हो

हुस्न ज़रा श्यामल हो जाये।।


बाहों को पतवार बना लें

बेशक़ जग जलथल हो जाये।।


मन घट प्रणयामृत से भर लो

भव पथ सुगम सरल हो जाये।।


उठें हिलोरें  फिर संगम की

तन शुचि मन निर्मल हो जायें।।


कौन क़यामत तक रुकता है

बेहतर है इस पल हो जाये।।


आज सुरेश मिला है मिल लो

ख़ूब सुना है कल हो जाये।।


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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