क्यों इतने बदहवास से बैठे हुए हो तुम।

मुद्दत हुई उदास  से बैठे हुए हो तुम।।


कपड़े नहीं ख़याल से जो बरहना लगे

कुछ ऐसे बेलिबास से बैठे हुए हो तुम।।

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