मैं हैरां हूँ कि मैं इस दौर में हूँ।

गनीमत है कि अब भी दौड़ में हूँ।।

यहाँ अब जिंदगी जद्दोजहद है

मैं अपने आप से ही होड़ में हूँ।।

ग़नीमत है कि मेरा वोट भी है

नहीं तो मैं कहाँ किस जोड़ में हूँ।।

मुझे इंसान कब समझा किसी ने

सभी के वास्ते मैं और में हूँ।।

मैं इंसां हूँ इसी से मर रहा हूँ

मैं दिल्ली में हूँ या लाहौर में हूँ।।

सुरेशसाहनी

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