यूँ भी आतिश पनाह होना है।
एक दिन सब तबाह होना है।।
हुस्न काजल की कोठरी ठहरा
साफ दामन सियाह होना है।।
क्या करेगा निगाह शाइस्ता
क्या तुझे बदनिगाह होना है।।
अब नवाजा है मेरे मुर्शिद ने
घर मिरा ख़ानक़ाह होना है।।
जिस के सिर पर हो हाथ संजर का
एकदिन उसको शाह होना है।।
आशिक़ी और फिर ग़ज़लगोई
साहनी को तबाह होना है।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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