हम सोचे काहे ये सुन्दर सिरजन काट रहे हैं

वे बोले हम केक नाम का व्यंजन काट रहे हैं।।

दीप जलाने वाले वारिस बुझा रहें कंदीलें

पहले जीवन जीते थे अब जीवन काट रहे हैं।।

साहनी

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