ज़िन्दगी अपने कैदखाने से।
दूर ले चल किसी बहाने से।।
सब हैं अपने ही आस्ताने से।
क्या शिकायत करें ज़माने से।।
सब समझते हैं होश है मुझको
बाज़ आया मैं लड़खड़ाने से।।
तेरे दर पे भी सरनिगू है हम
क्या मिला तेरे पास आने से।।
लोग सुनकर हँसी उड़ाते हैं
दर्द घटते नहीं बताने से।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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