उनसे मिलने के बहाने ढूंढें।

फिर मुहब्बत के ज़माने ढूंढें।।

फिर कहानी में रवानी आये

दास्ताँ खोजें फ़साने ढूंढें।।

हम तो उनमें ही उन्हें ढूढेंगे

किसलिए ग़ैर के साने ढूंढें।।

कौड़ियाँ सीपियाँ कंचे पत्थर

थे जो बचपन के खजाने ढूंढें।।

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