कैसे कह दें कि हम रहे तन्हा
कौन मानेगा ग़म रहे तन्हा
हम थे मज़लूम भीड़ का हिस्सा
वो थे करके सितम रहे तन्हा
जो थे अहले यक़ीन साथ रहे
सिर्फ़ अहले-वहम रहे तन्हा
भीड़ के बाद भी न जाने क्यों
पत्थरों के सनम रहे तन्हा
मयकदे में हमें सुकून तो है
कौन जाकर अदम रहे तन्हा
सुरेश साहनी, कानपुर
9451545132
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