क्या कहा हम भी  यार थे  उनके

सब तो उम्मीदवार थे उनके


हम भी थे हुस्न के असीरों में

पर न बीमार- वार थे उनके


एक हम आशना रहे तो क्या 

यूँ तो आशिक़ हज़ार थे उनके


ख़ूब चर्चे थे दौरे कालेज में

हर तरफ़ इश्तेहार थे उनके


हुस्न तो बेपनाह था उन पर

हर तरफ जाँनिसार थे उनके


तब खिज़ां का उन्हें ख़याल न था

क्या गुमाने-बहार थे उनके


आज कतरा रहे हो मिलने से

कल बड़े ग़मगुसार थे उनके


सुरेश साहनी कानपुर 

9451545132

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