दूर रहते हुये ही मिल लेना।

कुछ झिझकते हुए ही मिल लेना। 


दिन निकलते हुये ही मिल लेना।

शाम ढलते हुये ही मिल लेना।।


तुमसे करने हैं कुछ सवाल मुझे

नफ़्स रहते हुये ही मिल लेना।।


मिल न पाये उरूज़ के दौरान

ख़ैर ढलते  हुये ही मिल लेना।।


रात तुम नींद से रहे बोझिल

आँख मलते हुए ही मिल लेना।।


रुक के शायद कभी न मिल पाओ

तुम टहलते हुये ही मिल लेना।।


वस्लो-फुरक़त कि अब किसे परवाह

पर न मिलते हुये ही मिल लेना।।


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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