हर इक महरम की आदत हो गयी है।

कि उसके  ग़म की आदत हो गयी है।।


मिरे इस हाल पर हैरां न होना

दरे-बरहम की आदत हो गयी है।।


मिरी बदहालियों पर तंज करना

अभी आलम की आदत हो गयी है।।


मुहब्बत अशरफों में ढूँढता है

उसे खातम की आदत हो गयी है।।


उलझ कर रह गयी है जैसे हौव्वा

यही आदम की आदत हो गयी है।।


महरम/उपेक्षा,प्रतिबंधित संज्ञायें

बरहम/अस्त व्यस्त, परेशान,कुद्ध

आलम/संसार, स्थिति

अशरफ/श्रेष्ठ, ऊँचे लोग

खातम/ मुहर, ठप्पा या श्रेष्ठ चिन्ह


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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