और किसको मलाल है मुझसे
आज मेरा सवाल है मुझसे
पाल बैठा हूँ ये ग़लतफ़हमी
हर उरुज़ो-,जवाल है मुझसे
मेरा होना है वक़्त का होना
रात दिन माहो साल है मुझसे
ग़म तेरे आज भी यतीम नहीं
दर्द की देखभाल है मुझसे
रात भर मैं ही मुझसे उलझा हूँ
जिस्म मेरा निढाल है मुझसे
मैं ज़माने की लय समझता हूं
पर ज़माने की ताल है मुझसे
जाने कितने असीर हैं मेरे
साहनी तक निहाल है मुझसे
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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