हम जमीं आसमान हैं गुरुवर
हाँ जगत से महान हैं गुरुवर
है जगत राग रंग में ग़ाफ़िल
नाद अनहद की तान हैं गुरुवर
बस अहम मानने नहीं देता
किस क़दर ज्ञानवान हैं गुरुवर
ब्रम्ह सम हैं कि गुरु स्वयं शिव हैं
या जगतपति समान हैं गुरुवर
जिनसे विज्ञान भी समादृत है
धर्म का वह निशान हैं गुरुवर
सुरेश साहनी कानपुर
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