फागुनी अंगड़ाईयों के दिन गये

सावनी पुरवाईयों के दिन गये


अब कहाँ वो मस्तियाँ मदहोशियां

बेवज़ह रुसवाईयों के दिन गये


फाग कजरी और सोहर गुम हुये

गूँजती अंगनायियों के दिन गये


तीर नज़रें और मेरा सांवरा

हाय उन हरजाईयों के दिन गये


आ चुका है यार मेरा वज़्म में

साहनी तन्हाइयों के दिन गये

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