खुशी के पल सँजोना चाहती है।
तमन्ना हँस के रोना चाहती है।।
फलक बेशक़ जगाना चाहता हो
ज़मीं भर नींद सोना चाहती है।।
उसे मुझ से मुहब्बत खाक़ होगी
वो नादाँ है खिलौना चाहती है।।
थकी जाती है फिर भी ज़िंदगानी
खुद अपनी लाश ढोना चाहती है।।
मुहब्बत में मेरी हस्ती बिखर कर
सरापा नूर होना चाहती है।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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