दद्दा जबसे हाथ धरे हैं

जाने कितने रुठ गए हैं।

देख देख कर ये गुटबाजी

हम अंदर से टूट गए हैं।।

Comments

Popular posts from this blog

भोजपुरी लोकगीत --गायक-मुहम्मद खलील