हमने दुश्वारियों के हल खोजे

उसने अपने सुनहरे कल खोजे।।


इश्क़ तो झोंपड़ी में भी खुश है

हुस्न बेशक़ बड़े महल खोजे।।


उस क़यामत के मुन्तज़िर हैं हम

खोजना है जिसे अज़ल खोजे।।


हम निबाहेंगे खार से बेशक़

वो कोई गुल कोई कंवल खोजे।।


आशिक़ी साहनी से मुश्किल है

काम कह दो कोई सरल खोजे।।


साहनी सुरेश कानपुर

9451545132

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