उनकी सत्ता की रखवाली करनी है।
हमको अपनी पॉकेट खाली करनी है।।
हमको अपना धर्म बचाये रखना है
तुमको मज़हब की रखवाली करनी है।।
नामुमकिन है ग़ुरबत में इक अपना घर
फिर भी तुमको ख़्वाबख़्याली करनी है।।
तुम सुरेश शायर हो कैसे सोच लिया
अपूर्ण
उनकी सत्ता की रखवाली करनी है।
हमको अपनी पॉकेट खाली करनी है।।
हमको अपना धर्म बचाये रखना है
तुमको मज़हब की रखवाली करनी है।।
नामुमकिन है ग़ुरबत में इक अपना घर
फिर भी तुमको ख़्वाबख़्याली करनी है।।
तुम सुरेश शायर हो कैसे सोच लिया
अपूर्ण
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