गान्धी तुम्हे ज़रूरत क्या थी

ऐसी धरती पर आने की

सत्य अहिंसा दया क्षमा सब

हों अक्षम्य अपराध जहाँ पर


पर तुम भी अहमक़ थे शायद

उन अंग्रेजों से लड़ बैठे

जो तुमको आदर देते थे

और लड़े भी किनकी ख़ातिर


उनकी ख़ातिर समझ गए ना?

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