दिल लगाने की तमन्ना रह गयी।
उसको पाने की तमन्ना रह गयी।।
प्यार का जो कोष उसके पास था
उस खज़ाने की तमन्ना रह गयी ।।
जीतना तो प्यार की फितरत नहीं
हार जाने की तमन्ना रह गयी ।।
जो ग़ज़ल उस पर कही थी इक दफा
वो सुनाने की तमन्ना रह गयी ।।
संग बीते वो न होती ज़िन्दगी
पर बिताने की तमन्ना रह गयी ।।
ज़िन्दगी जलसा समझ कर साहनी
थी मनाने की तमन्ना रह गयी ।।
साहनी सुरेश, कानपुर
9451545132
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