प्रीति का नवगीत अर्पित
मन तुम्हें मनमीत अर्पित
हार कर सर्वस्व अपना
कर रहा हूँ जीत अर्पित।।
नभ ने अगणित तारकों से
थाल पूजा के सजाये
और बंदनवार कितने
ऋतु ने उपवन में बनाये
पंक्तिबद्धित स्वागतम हित
रस्म अर्पित रीत अर्पित।।........
नभचरिय समवेत कलरव
मंत्र मोहित कर रहा मन
केलि कलियों से भ्रमर दल
का पुलकित कर रहा तन
ताल स्पंदन हृदय सह
स्वास का संगीत अर्पित।।.....
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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