तुम क्या क्या अन्जाम बताते फिरते हो
रावण को भी राम बताते फिरते हो
उल्फत के परिणाम बताते फिरते हो
तुम किनको नाकाम बताते फिरते हो
भोले हो तुम सचमुच दिल के मसलों में
हर छलिया को श्याम बताते फिरते हो
दुनिया उनके अफसाने दोहराती है
तुम जिनको बदनाम बताते फिरते हो
ये लम्पट जो गरज रहे क्या बरसेंगे
क्यों हर घन घनश्याम बताते फिरते हो
तुम अमीर हो बेशक़ हुस्न की दौलत से
इश्क़ मगर क्यों आम बताते फिरते हो
कुछ सुरेश समझो नाहक़ मधुशाला को
नङ्गों का हम्माम बताते फिरते हो
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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