आपकी बेपर्दगी की बात जाने दीजिये।
छोड़िये शर्मिंदगी की बात जाने दीजिये।।
हुस्न उनका पा चुका है अब जवालों का उरूज़
इश्क़ के दीवानगी की बात जाने दीजिये।।
जबकि दरियाओं की गहराई से हम दो चार हैं
उस ज़ुनूने-तिश्नगी की बात जाने दीजिये।।
कम से कम इस उम्र में तो दिल्लगी अच्छी नहीं
आप और संजीदगी की बात जाने दीजिये।।
मर चुकी हैं हसरतें चाहत ख़यालो-ख़्वाब सब
अब हमारी ज़िन्दगी की बात जाने दीजिये।।
सुरेश साहनी,कानपुर
9451545132
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