साथ उसके अगर नहीं कटती।।

ज़िन्दगी उम्र भर नहीं कटती।।


उस तरफ फिर भी कट ही जाती है

ज़िंदगानी इधर नहीं कटती।।


साथ मिलता तो काट लेते हम

जीस्त तन्हा मगर नहीं कटती।।


ज़िन्दगी क्या कहें कि बिन तेरे

अपनी शामो सहर नहीं कटती।।


साहनी क्या करे  शब-ए-हिज्राँ

लाख हों मुख्तसर नहीं कटती।।


सुरेश साहनी कानपुर

9451545132

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