और तुझ पर यक़ीन कर लें हम।
क्या हवा को ज़मीन कर लें हम।।
डसने वालों से एहतियात रखें
या क़लम आस्तीन कर लें हम।।
हुस्न के पैंतरे न आएंगे
लाख ख़ुद को ज़हीन कर लें हम।।
आदमियत कहीं न मर जाये
यूँ न ख़ुद को मशीन कर लें हम।।
हुस्न को जाविदां बनाने को
ख़ुद को अब दो से तीन कर लें हम।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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