माना तुम सरकार नहीं हो।
पर इतने लाचार नहीं हो।।
सच को सच तो बोलो बेशक़
सच के ठेकेदार नही हो।।
क्या दिक्कत है सच लिखने में
सरकारी अख़बार नहीं हो।
इतने जुमले इतने धोखे
इंसा हो अवतार नहीं हो।।
कुछ तो हरकत हो चिंतन में
क्या बिलकुल तैयार नहीं हो।।
क्या ख़ुद को कमजोर बताना
चीटीं से बेकार नहीं हो।।
नाविक हो तुम लड़ो साहनी
बेशक़ पारावार नहीं हो।।
सुरेश साहनी कानपुर
9451545132
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